Thursday, November 15, 2012

पिताजी ने कहा


 
पिताजी ने कहा  
हमेशा सच बोलना,
!!?!!
झूट को सच बनाकर;
अब झूट सच ही लगता !
कोरा सच हज़म नहीं होता,
और मैं सच ही बोलता हूँ |


पिताजी ने कहा
हमेशा ईमानदार रहना,

!!?!!
हर ज़गह है बकरार;
बेईमानी की ईमानदारी !
इमान से पेट नहीं भरता ,
स्वार्थ  के प्रति मैं ईमानदार हूँ |


पिताजी ने कहा
हमेशा न्याय का साथ देना,

!!?!!
अन्याय से चले सरकार;
अन्यायीयों का दामन थामे !
न्याय भरे बज़ार नगां होता ,
अन्याय सहकर न्याय करता  हूँ |

पिताजी ने कहा
इन बातों से सुखी रहोगे देखना,

!!?!!
पिताजी की हर बात हरबार;
क्या जरुरी है सही होना ?
पर सुखी होने के लिये,
मैं उसे किसी भी तरह निभाता हूँ|


(पिता बोले थे-नामक हरीश करमचंदानीजी की कविता से प्रभावित)
सजन कुमार मुरारका

No comments:

Post a Comment